Article: Guru Puja

"जय गुरू देव"
मैं उत्तरा दीक्षित पत्नी श्री ईश्वर दास दीक्षित मण्डी (हि० प्र०) की निवासी हूं। मैं स्वास्थय विभाग में सांख्यकीय सहायक (Statistical Assistant) के पद पर कार्यरत हूं। वर्ष १९९३ में माह सितम्बर में मेरा स्थानान्तरण मण्डी से कुल्लू हुआ तो मन उदास हो गया। घर परिवार से दूर जाना पड़ा पर उसी कार्यालय में श्रीमति अंजना शर्मा, श्रीमति हीरा देवी व श्रीमति सोमलता जो मेरी पूर्व परिचित थीं, से महादेवी तीर्थ व "श्री मां जी" के बारे में सुना तो मेरे मन में भी दर्शन करने की अभिलाषा जागी सो शीघ्र ही यह सौभाग्य प्राप्त हो गया। "श्री मां जी के दर्शन करके महादेवी के दर्शन करके जीवन धन्य हुआ। 'श्री मां जी' ने आशिर्वाद में मुझे एक पुस्तक "स्वामी जी के संस्मरण" दी। उस पुस्तक को मैंने कई बार पढ़ा, ,मनन किया लगा मेरी बिचारधारा को एक दिशा मिल गई। मैं अज्ञानी जो कविता की एक पंक्ती नहीं लिख सकती थी, मुझे लगा मैं भक्त तथा कवि हूं। महादेवी तीर्थ के बारे में एक भैंट "स्वामी जी ने स्वर्ग रचाया" लिख पाई पर किसे सुनाऊं मन में उथल-पुथल होने लगी इसी तरह समय बीतने लगा माह दिसम्बर में "श्री मां जी" तीर्थ या‍त्रा पर चली गई। मैं उस पुस्तक को प्रतिदिन पड़ती तथा "श्री मां जी" तथा स्वामी जी के बारे में सोचती रही। करीब एक माह पश्चात जब "श्री मां जी" यात्रा से वापिस आई तो मैं उनके दर्शन हेतू मन्दिर गई तो रहा नहीं गया सो वह भेंट उन्हैं गा कर सुनाई तो वे अति प्रसन्न हुई आशिर्वाद दिया,कहा एक समय आएगा तेरी लिखी यह भैंट घर-घर में गाई जाएगी, तथा कहा कि तुम स्वामी जी के भजन बनाओ तो मुझे लगा कि हां मैं स्वामी जी के बहुत से भजन लिखुंगी, गाऊंगी। जब पहला भजन "आयो कहां से महाराज" लिखा और "श्री मां जी" को सुनाया तो वे प्रसन्न हुई तथा उस समय वहां उपस्थित लाला श्री साधू राम सूद जी की आंखों से आंसुओं की अविरल धारा बहने लगी तो मैंने सोचा और लिख भी सकती हूं और गा भी सकती हूं। सो श्री मां जी के आशीर्वाद से "राम तुम सेवक तुम्ही,तुम ही सेवक दास हो" लिख कर तथा गा कर श्री मां जी को सुनाया तो श्री मां जी ने मुझे बहुत-बहुत प्यार किया। माह जुलाई वर्ष १९९४ को गुरू पुर्णिमा पर जब मैंनें "श्री मां जी" से दीक्षा ली तथा स्वयं लीखित "गुरू बन्दना" गा कर उन्हैं सुनाया तो उस समय वहां उपस्थित स्व० श्री राम लाल सूद जी ने व श्री कृष्ण लाल सूद जी ने जब बहुत अच्छे कहा तो मेरी लेखनी को और अधिक बल मिला और एक अज्ञानी हृदय कवि बन गया सो कभी रात को सोते से जाग जाया करती थी और जब भजन की पंक्तियां बनती उन्हैं लिखती मन ही मन गाती फिर जब "श्री मां जी" को कुछ दिनों बाद जा कर सुनाती और उनका आशीर्वाद पाती तो प्रसन्न मन से एक और भजन बनाने का प्रयास करती इस तरह मैंने अब तक जो भजन बनाये थे, "श्री मां जी ने उन्है एक छोटी सी पुस्तिका में छपवा दिया बाद में भजन स्तवन में सारे भजन छपवाए तथा भजन कैसेट भी बनवाये। मन से निकली मेरी भोली भावना जव स्वामी तक पहुंची कि 'अज्ञानी हूं' व 'फिर भी बाबा कभी तो मुझे दर्शन देना' , सो स्वामी जी ने ११ दिसम्बर १९९५ को पुर्णिमा बाले दिन 'श्री मां जी' के साथ मन्दिर में गुफा के बाहर साक्षात दर्शन दिए मेरे हाथों जल ग्रहण किया हमें प्रशाद दिया और ज्ञान दिया कि सत्संग करो, सबका मालिक एक है, गुरू चरित्र पढ़ो 'श्री मां जी' को साष्टांग प्रणाम किया "श्री मां जी से ज्ञान मांगा कि मां आप मुझे ज्ञान दो तो इस दृश्य को देखकर लगा कि गुरु ने गोविन्द से मिलवा दिया, मेरा यह तुच्छ जीवन धन्य हुआ। सो धन्य है, पूजनीय गुरूदेव, धन्य हैं 'श्री मां जी', धन्य हैं 'श्री महाराज' और धन्य है उनके द्वारा रचाया गया स्वर्ग "श्री महादेवी तीर्थ कुल्लू।
उत्तरा दीक्षित
मण्डी (हि०प्र०)

 Even water, which has a natural tendency to flow downwards, is drawn up to the sky by the sun's rays. In the same way, God's grace lifts up the mind which has got a tendency to run after sense objects. Sharda Maa

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