Chapter 2.7

बिजली महादेव की यात्रा १९७३
सावन का महीना-भगवान शिव की पूजा के लिए भक्त मण्डली एकत्रित होकर स्वामी जी के साथ 'बिजली महादेव' की चोटी की ओर बढ़ी। लगभग २५ भक्त पुरूष एवं महिलाएं थीं। सबने भण्डारे का थोड़ा-थोड़ा सामान उठाया था। धीरे-धीरे गाते बजाते; प्राकृतिक सोंदर्य को निहारते भक्त मण्डली सायंकाल मन्दिर जा पहुंची। मन्दिर के भीतर जाने पर श्री महाराज जी ने देखा कि गर्भगृह में जहां शिवलिंग स्थापित है, कमरे में कुड़ा करकट भरा है। इसलिए सबको आज्ञा हुई कि बैठने से पहले पूरे प्रकोष्ठ की सफाई व लिपाई हो। भक्त लोग सफाई करने में जुट गए शीघ्र ही सफाई होने पर माताओं ने गोबर से लिपाई की। कुछ नवयुवकों ने पास जंगल से सूखी लकड़ियां लाई और धूना जला दिया तथा चाय बनाई गई। फिर अखण्ड कीर्तन आरम्भ हो गया। रात भर कीर्तन होता रहा। प्रातः काल पुनः शिवजी की पुजा तथा आरती हुई अब भण्डारा बनाने के लिए कठिनाई आई पानी की। मानो शिव भगवान ने जान-बूझ कर पानी का अभाव रखा है, ताकि सांसारिक लोग अधिक समय तक ठहर कर स्थान की पवित्रता को नष्ट न करे अतः पानी न होने के कारण यही विचार किया गया कि जंगल को पार कर के नीचे 'दारठ' गांव में भण्डारा बनेगा।
सबने शिवजी का जयकारा बोला-'हर-हर महादेव' और उतरना शुरू कर दिया। 'दारठ पहुंचकर सब भण्डारे की तैयारी में लग गये। खीर बनाई, मालपुड़े बनाए। फिर कन्या पूजन करके भण्डारा शुरू हो गया। कुल्लू से मन्दिर की ओर जाने वाले यात्रियों तथा बिजली महादेव से लौटने वाले यात्रियों को श्रद्धापूर्वक प्रसाद खिलाना आरम्भ कर दिया। फिर सब भक्तों ने तथा श्री महाराज ने प्रसाद खिलाना आरम्भ कर दिया फिर सब भक्तों ने तथा श्री महाराज ने प्रसाद पाया। भक्त मण्डली सायं काल तक कुल्लू लौट कर पहुच गई। यह यात्रा अगस्त १९७१ में हुई। इससे पूर्व शायद ही इस प्रकार का भण्डारा हुआ हो उन दिनों आजकल के विपरीत, सावन महीने में भी भण्डारा नहीं होता था। श्री महाराज ने इन्हीं दिनों मां भुवनेश्वरी के मन्दिर (गांब भेखली) में भी भण्डारा किया और मां जगदम्बा की पूजा की थी। इसके अतिरिक्त बाबा बालक नाथ (बदाह) में भी एक विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया था जिसमें अन्तरंग और बहिरंग सभी भक्तों ने हिस्सा लिया था। रात तक भजन कीर्तन और भण्डारा चलता रहा मनाली में गुरू वशिष्ठ के मन्दिर में भी श्री महाराज ने अपने अन्तरंग भक्तों के साथ गए और भण्डारा बनवा कर सबको खिलाया था। इस प्रकार श्री महाराज जी १९६९ से १९७४ के अन्तिम भाग तक कुल्लू के विभिन्न मन्दिरों में दर्शनार्थ गए और भक्तों के लिए दिल में श्रद्धा पैदा करते रहे। धर्म का पुनरूत्थान करने के लिए भक्तों के मन में पूर्ण श्रद्धा और विश्वास पैदा करना उनका मूल-भूत कार्य रहा है। इस अवधी में श्री महाराज जी ने जो भण्डारे किए उनकी सुची नीचे दी जाती है।
क्रमांक स्थान यात्रा तिथि
१ मथुरा-वृन्दावन की यात्रा अक्तूबर, १९६९
२ मां वैष्णु देवी की यात्रा अप्रैल,१९७०
३ जयपुर-पुष्करराज यात्रा १२ अगस्त,१९७१
(विराट मूर्ति विग्रह लाने हेतु) ४ बाबा बालक नाथ मन्दिर, टिकर बाबाड़ी बदाह में भन्डारा सन् १९७२
५ वशिष्ट मुनि के मन्दिर मनाली में भण्डारा ५ जुलाई,१९७३
६ बिजली महादेव यात्रा अगस्त, १९७३
७ वैष्णू देवी यात्रा(माताऔं सहित) नवम्बर,१९७३
(लौटती बार) ज्वाला मुखी में नवम्बर,१९७३
८ चित्रकूट यात्रा फरबरी, १९७३
९ हरिद्वार यात्रा(शक्ति पूजा के साथ) मार्च,१९७३

 Even water, which has a natural tendency to flow downwards, is drawn up to the sky by the sun's rays. In the same way, God's grace lifts up the mind which has got a tendency to run after sense objects. Sharda Maa

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