Chapter 1.19

योग बलसाधन एवं त्योहार मनाने की प्रथा का आरम्भ
अब हम इन चतुर्मुख साधनाओं के साधनाकाल का अन्य विवरण दें। दिसम्बर १९७० में मां पूर्णतया स्वतन्त्र हो गई थीं। बाबा का स्वप्न पूरा हो गया। इन दिनों बाबा की बाईं टांग में भारी दर्द था। इसलिए बाबा मन्दिर छोड़कर श्याम के घर पर ही रहते थे। भक्त लोग उनके दर्शनों के लिए वहीं जाते। मन्दिर में एक पुजारी और एक सेवक नियुक्त कर दिए गए थे। उनकी देख-रेख के लिए भक्तों को मन्दिर भी जाना होता था। परन्तु उनका मुख्य आकर्षण श्याम का घर ही था। क्योंकि बाबा वहीं पर रहते थे। बाबा ने अपने सिराहने वाली दीवार पर लिखवा दिया था- 'दवाई की आवश्यकता नहीं-दुआ की आवश्यकता है।'
भक्तों के आग्रह करने पर भी बाबा ने दवाई नहीं ली। योग बल से ही दर्द ठीक होने लगा। उधर मन्दिर में रहने वाले पुजारी के पास एक साधू आ गया पुजारी और साधू ने मिलकर एक अनुष्ठान आरम्भ किया। अनुष्ठान उसी कुटिया में किया गया जिसमें बाबा आराम करते थे। सात दिन का यह अनुष्ठान पूरा हुआ तो पुजारी बाबा के लिए प्रसाद लेकर श्याम के घर आया, लेकिन अन्तर्यामी बाबा सब जान चुके थे कि यह अनुष्ठान व प्रसाद बाबा की मृत्यु के लिए ही किया गया था। इसलिए बाबा ने पुजारी को एक भक्त द्वारा मन्दिर से छुट्टी दिलवा दी अब साधू भी भाग गया। १९७१ की शिवरात्रि को सायंकाल बाबा जी ने लगभग पांच सौ भक्तों के साथ आखाड़ा बाजार से मां वेष्णो देवी के मन्दिर तक की भगवान शंकर की शोभायात्रा(झांकी) निकाली। और मन्दिर आकर महाशिवरात्रि का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया और भण्डारा किया। इन दिनों भण्डारे व्यास नदी के किनारे विछी रेत पर ही खुली जगह मनाये और खिलाये जाते थे। दिनभर और सारी रात 'ॐ नमः शिवाय' के अखण्ड पाठ से श्री महादेवी तीर्थ का पवित्र वातावरण गुंजायमान था।
उन दिनों श्री मति कुसुम सूद(लाला कुलजस राय सूद की पुत्रवधू एवं श्री नरेन्द्र की धर्मपत्नी) अपने एक वर्षीय बालक को गोद में लिए भण्डारे की सेवा में रत रहती थी। अप्रैल में श्री रामनवमी का उत्सव और भी अधिक हर्षोउल्लास से सम्पूर्ण हुआ था। प्रथम नवरात्री को 'महामन्त्र' 'हरे राम हरे कृष्ण' का पाठ शुरू हुआ। भक्त लोग दिन रात पाठ करते। कुछ भक्त चाय और भण्डारा तैयार करते। आने-जाने वाले सभी श्रद्धालुओं को चाय व प्रसाद मिलता। नारायण जी ( श्री डीनु राम जी) को आदेश हुआ कि वह नौबत व कुलबी बाजा ले आएं। सजला से देवता का बाजा आया नौबत बजी। दसवीं के दिन विशाल भण्डारा हुआ। इस तरह १९७१ से सभी त्यौहार गुरू पूजा, श्री कृष्ण जन्माष्टमी, दुर्गा पूजा, बड़ी धूम-धाम से मनाये गये।

 Even water, which has a natural tendency to flow downwards, is drawn up to the sky by the sun's rays. In the same way, God's grace lifts up the mind which has got a tendency to run after sense objects. Sharda Maa

Submit articles- articles@mahadevitirth.com | sharadvani@mahadevitirth.com   Questions - admin@mahadevitirth.com

Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth    

outils espionnage pc mobile surveillance kit press application pour espionner les messages espionner iphone 3gs ios 5 comment dГ©tecter un logiciel espion sur son mobile press here press espionner un espionner un iphone 4 a distance espionner avec mobile surveillance software in india cell phone spy software reviews