Chapter 1.18

रामचरित मानस पाठ की प्रणाली का शुभारम्भ
अब बाबा ने अपने भक्तों को आज्ञा दी कि वह मां का साथ दें। प्रतिमास श्री रामचरित मानस का अखण्ड पाठ शुरू हुआ। प्रतिदिन बच्चों का सत्संग होता। बाबा जी कभी-कभी बच्चों के सत्संग में आते और अखण्ड पाठ में भी। सजला से विजय श्री डीनू राम जी, ईश्वरी जी,मदन जी, लाला साधूराम जी, रामशीतल जी, शादी लाल जी, रामलाल तथा महिला भक्त भी इस पाठ में हिस्सा लेती। प्रतिमास एक भक्त हलवा-प्रसाद बनाने की जिम्मेदारी लेता और अपने घर पर हलवा रोट आदि बनाकर सत्संग में ले आता। पाठ सम्पूर्ण होने पर भोग लगाया जाता कीर्तन होता, और प्रसाद लेकर सभी भक्त अपने-अपने घरों को जाते। ऐसा लगता था मानो राम नाम की हाट लगी है, जिस भक्त से जितना लिया जाता उतना ही ले लेता। आखाड़ा बाजार मानो "राम नाम की लूट है, लूट सके सौ लूट, अन्त काल पछताएगा, प्राण जाऐंगे छूट" से गुंजायमान हो रहा था। भक्त जन इस राम नाम का जी भर कर पान करते। लगभग दो वर्ष श्याम के घर पर राम नाम का संकीर्तन तथा पाठ हुआ।
अब श्रीयुत गोपेन्द्र जी के घर सत्संग व मासिक अखण्ड पाठ होने लगा। अतः १९७० से १९७२ तक श्याम के घर पर और १९७२ से १९७४ दिसम्बर तक श्रीयुत गोपेन्द्र जी के घर सत्संग का आयोजन पूरा हुआ कयोंकि १२ दिसम्बर १९७४ को मां गीता घर त्याग कर मन्दिर में आ गई थीं। इन चार वर्षों में बाबा ने मां से बहुमुखी साधना करवाई। प्रथम तो सत्संग, संकीर्तन, अखण्ड पाठ तथा मन्दिर में होने वाले बड़े-बड़े भण्डारों में आकर जनता जनार्दन की सेवा। द्वितीय,प्रतिदिन प्रातः तीन बजे उठकर स्नान शौच से निवृत होकर पूजा पाठ करके पांच बजे मन्दिर के मुख्य-मुख्य कार्य करना और वापिस पाठशाला जाकर बच्चों को शिक्षा प्रदान करना। (इन दिनों मां जूनियर बेसिक ट्रेनिंग स्कूल कुल्लू में कार्यरत थीं।) और सायं-काल आकर दैनिक सत्संग करके ध्यान लगाना और कभी आवश्यकतानुसार मन्दिर में आकर सेवा करना। इसके अतिरिक्त इन चार वर्षौं में मां ने श्री महाराज जी के साथ कुछ यात्रायें की- जिनके अनुभव साधना के पूरक बने।
इन तीन साधनाओं के साथ मां का हृदय अन्तरतम की आत्मा को छू गया। अन्तर आत्मा के दर्शन करके मां धन्य हो गई और साथ ही उन्होंने अपने आपको पहचान लिया कि वह कौन हैं? और इस धरा पर क्यों आई हैं? इस प्रकार बाबा के प्रति मां के भाव साकार हो उठे उन्हे लगा कि बाबा इस स्थूल देह में राम हैं और उनके लिए यहां आए हैं। इस प्रकार चतुर्मुख साधना करते हुए मां देवी प्रेरणा पाकर धन्य हो गई।

 Even water, which has a natural tendency to flow downwards, is drawn up to the sky by the sun's rays. In the same way, God's grace lifts up the mind which has got a tendency to run after sense objects. Sharda Maa

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