Chapter 1.10

श्री महाराज के अन्नय भक्त श्री साधू राम जी
इन्ही दिनों के श्री महाराज जी के अन्य अन्नय भक्तों के नाम इस प्रकार हैं -लाला साधुराम, अखाड़ा बाजार निवास स्थल से ही इनके अन्नय भक्त रहे हैं। जब श्री महाराज अखाड़ा बाजार को छोड़कर वर्तमान स्थान में आ गये तो लाला जी की सेवायें भी इधर ही समर्पित होने लगीं मानो जगत जननी अम्बा ने अपने लाडले के लिये रससदार भी स्वयं ही चुना हो। लाला जी सम्पन्न परिवार से सम्बन्धित हैं, और गृहस्थ धर्म के पालने में अग्रगण्य हैं। साथ ही निष्काम कर्मयोग इनके दैनिक जीवन का एक अंग है। गऊ सेवा, सन्त सेवा, दीन दुखियों पर दया करना इनके जीवन का मुख्य ध्येय है। उस समय उनकी आयु रही होगी लगभग पचास वर्ष। रंग गोरा शरीर गठा हुआ, चेहरे से झलकती है सज्जनता। अहम् मानो छू तक नहीं गया हो। देखने वाला दूर से ही कह दे कि कोई सज्जन आ रहे हैं। जगतजननी ने अपने कार्य के लिए लाला जी के पूर्व जन्म के पुण्य कर्मों का लेखा-भली प्रकार देखकर लाला जी को बाबा की सेवा का मूक सन्देश दिया था। इन दिनों मन्दिर नया नया बन रहा था। आटा, चावल, दाल, घी तथा पूजा की सामग्री भी लाला जी लाते थे। लाला जी प्रातঃ काल अपने घर के नित्यकर्मों से निवृत होकर हाथ में भरा थैला उठाकर प्रभु भक्ति के रंग में रंगे हुए आखाड़ा बाजार से मन्दिर की ओर पैदल ही चल देते। श्री महाराज जी भी इनकी प्रतिक्षा में रहते थे। दोनों एक-दुसरे को देखकर मन ही मन प्रसन्न हो उठते। मानो लाला जी को मिल गए साकार ईष्ट-देव और बाबा को मिल गए शिव भक्त राजा-जनक । 'श्री महाराज' जी प्रायঃ कहा करते थे "लाला जी, जनक हैं जनक"। यह गृहस्थ में भी बड़े भक्त हैं। लाला जी के चेहरे की गम्भीरता और शान्ती इनकी अन्तरंग भक्ति की परिचायक है। कई बार लाला जी को सन्देश भेज दिया जाता कि अमुक सामान लाओ। यहां तक की धूने के लिए लकड़ी भी जब न मिले, तो लाला जी ही लकड़ियों का गट्ठा साइकिल पर लादकर, पैदल ही साइकिल को घसीट कर लाते और धूने में अग्नि प्रज्जवलित हो उठती। अगर कोई सज्जन उनकी प्रशंसा भी करते तो लाला जी कह देते "यह-क्या। यह सब 'श्री महाराज' का ही प्रताप है"। अगर कभी-कभी स्वयं बाबा जी अपने मुखारबिन्द से उनकी प्रशंसा करने लगते तो लाला जी का चेहरा एकाएक गम्भीर हो उठता और झट कह देते- "यह सब आपका ही है, आप आज्ञा दीजिए, महाराज।" यहां यह उल्लेखनीय होगा कि इन धर्मराज लाला जी के हाथ में मन्दिर की कुन्जी सौंप कर बाबा जी निश्चिन्त हो गये। आज तक लाला जी की सेवायें निर्बाध रुप से चली आ रही हैं।

 Even water, which has a natural tendency to flow downwards, is drawn up to the sky by the sun's rays. In the same way, God's grace lifts up the mind which has got a tendency to run after sense objects. Sharda Maa

Submit articles- articles@mahadevitirth.com | sharadvani@mahadevitirth.com   Questions - admin@mahadevitirth.com

Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth    

outils espionnage pc mobile surveillance kit press application pour espionner les messages espionner iphone 3gs ios 5 comment dГ©tecter un logiciel espion sur son mobile press here press espionner un espionner un iphone 4 a distance espionner avec mobile surveillance software in india cell phone spy software reviews